उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaqin kyunkar na karte ho

यक़ीं क्यूँकर न करते हो

یقیں کیونکر نہ کرتے ہو

शायर: Nadeem Najid8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यक़ीं क्यूँकर न करते हो
दरून-ए-दिल धड़कते हो

हमारा मसअला समझो
मोहब्बत को समझते हो

निज़ाम-ए-कुन की हैरत को
फ़क़त हैरत समझते हो

हमीं ने ख़ून थूका है
हमीं पे आह भरते हो

सुना आँखों की वीरानी
को तुम सपनों से भरते हो

हमारी राह सीधी है
तभी तो राह तकते हो

दिल-ए-मश्कीज़ा-ए-जाँ में
महकते थे महकते हो

किसी पे हम भी मरते हैं
किसी पे तुम भी मरते हो