उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yar ahbab to ghar jaenge

यार अहबाब तो घर जाएँगे

یار احباب تو گھر جائیں گے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यार अहबाब तो घर जाएँगे
और हम ख़ुद में बिखर जाएँगे

ख़ामुशी है न है कोई आवाज़
ऐसे 'आलम में तो मर जाएँगे

फैलता जा रहा है सन्नाटा
ज़ख़्म आवाज़ के भर जाएँगे

क्या धनक टूट के गिर जाएगी
क्या सभी रंग बिखर जाएँगे

घर से निकले थे तहय्या कर के
घर बुलाएगा तो घर जाएँगे

शाम के बा'द नहीं है रस्ता
शाम के बा'द किधर जाएँगे