उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad mazi ki dilaunga chala jaunga

याद माज़ी की दिलाऊँगा चला जाऊँगा

یاد ماضی کی دلاؤں گا چلا جاؤں گا

शायर: Haamid Bhusawali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद माज़ी की दिलाऊँगा चला जाऊँगा
आग सीने में लगाऊँगा चला जाऊँगा

यार दो चार हरीफ़ों की तरफ़ क्या देखूँ
सैकड़ों दिल में समाऊँगा चला जाऊँगा

अब के आया हूँ तो आईना-नुमा लोगों को
सच का आईना दिखाऊँगा चला जाऊँगा

तेरे होंटों पे तबस्सुम को सजाने के लिए
दीप यादों के जलाऊँगा चला जाऊँगा

हाथ ही सिर्फ़ मिलाना मिरी फ़ितरत में नहीं
दिल भी लोगों से मिलाऊँगा चला जाऊँगा

मेरी आमद पे भला इतनी क़यामत क्यों है
दाग़ सीने के दिखाऊँगा चला जाऊँगा