उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log humse KHushi se milte hain

लोग हम से ख़ुशी से मिलते हैं

لوگ ہم سے خوشی سے ملتے ہیں

शायर: Haamid Bhusawali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग हम से ख़ुशी से मिलते हैं
आप क्यों बे-दिली से मिलते हैं

मर्तबे में कमी तो आएगी
आप क्यों हर किसी से मिलते हैं

तुम से मिल के गुमान होता है
जैसे हम अजनबी से मिलते हैं

ज़िल्लतें झिड़कियाँ परेशानी
सारे ग़म मय-कशी से मिलते हैं

आप पर ए'तिबार है वर्ना
हम कहाँ हर किसी से मिलते हैं

रौशनी रूह में उतरती है
जब ख़ुदा के वली से मिलते हैं