उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hazar bar dikhai gai pari-surat

हज़ार बार दिखाई गई परी-सूरत

ہزار بار دکھائی گئی پری صورت

शायर: Haamid Bhusawali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हज़ार बार दिखाई गई परी-सूरत
निगाह को न तशफ़्फ़ी हुई किसी सूरत

मैं अपने आप से उक्ता के तेरे पास आया
तिरी नज़र में मिली फिर मुझे मिरी सूरत

इसी उमीद पे साँसों से जंग जारी है
कभी तो रू-ब-रू होगी मिरे तिरी सूरत

हिसार-ए-ज़ात से निकला तो ये खुला मुझ पर
भली के भेस में पिन्हाँ थी क्या बुरी सूरत

ख़ता मु'आफ़ कि है मो'तरिफ़ तिरा 'हामिद'
तिरे 'अलावा बची ही नहीं कोई सूरत