उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aasi se KHush nahin hai wali se bhi KHush nahin

'आसी से ख़ुश नहीं है वली से भी ख़ुश नहीं

عاصی سے خوش نہیں ہے ولی سے بھی خوش نہیں

शायर: Haamid Bhusawali6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'आसी से ख़ुश नहीं है वली से भी ख़ुश नहीं
ये कौन शख़्स है जो किसी से भी ख़ुश नहीं

ख़ुश था तिरे बग़ैर तो जलता था जी तिरा
आँखों में है नमी तो नमी से भी ख़ुश नहीं

कल मेरी कम-निगाही पे मातम-ज़दा था तू
अब ये सितम कि दीदा-वरी से भी ख़ुश नहीं

क्या मसअला है तुझ को बता कुछ तो मेरे यार
ग़म से भी ख़ुश नहीं तू ख़ुशी से भी ख़ुश नहीं

हम तो समझ रहे थे उजाले से बैर है
ये हुक्मराँ तो तीरा-शबी से भी ख़ुश नहीं

'हामिद' का क्या है हाल मुझे कुछ ख़बर भी है
तेरे बग़ैर अब वो परी से भी ख़ुश नहीं