उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum dil-jalon ke samne baaten visal ki

हम दिल-जलों के सामने बातें विसाल की

ہم دل جلوں کے سامنے باتیں وصال کی

शायर: Haamid Bhusawali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम दिल-जलों के सामने बातें विसाल की
ज़ालिम तिरी सज़ाएँ हैं कितने कमाल की

इस हुस्न पे तुम्हारे कई तब्सिरे हुए
ता'रीफ़ हो रही है हमारे ख़याल की

तुम ने ज़रा सी बात पे ठुकरा दिया मुझे
अब खोज कर रहे हो किसी ख़ुश-ख़िसाल की

ये भी ज़रा बताओ तकब्बुर की ज़द में थे
गर तुम सुना रहे हो कहानी ज़वाल की

सौ बार उस का शुक्र करें क्यों न हम अदा
हम को खिला रहा है जो रोज़ी हलाल की

हम को भी अपनी एक झलक ही दिखाओ ना
बातें बहुत सुनी हैं तुम्हारे जमाल की

उम्मीद है उठाओगे तुम भी दु'आ को हाथ
जिस दिन ख़बर सुनोगे मिरे इंतिक़ाल की