उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad ko nuqta-ba-nuqta joDo

याद को नुक़्ता-ब-नुक़्ता जोड़ो

یاد کو نقطہ بہ نقطہ جوڑو

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद को नुक़्ता-ब-नुक़्ता जोड़ो
यूँ दिल-ए-रफ़्ता का चेहरा जोड़ो

एक बे-रंग समा'अत हो तुम
सुर्ख़ आवाज़ से रिश्ता जोड़ो

गोश्वारा न बिगाड़ो शब का
चाँद आधा है तो आधा जोड़ो

ये जो तस्वीर शब-ए-वस्ल की है
इस में अब हिज्र का तारा जोड़ो

कार-ए-तन्हाई यहाँ ख़त्म हुआ
अब ये बिखरा हुआ कमरा जोड़ो

कुछ 'अनासिर ही मिरे ऐसे हैं
टूट जाता हूँ मैं जितना जोड़ो

वहशतें रक़्स में जोड़ो मेरी
और उसी मद में ये गिर्या जोड़ो