उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad aai wo zulf-e-pareshan

याद आई वो ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ

یاد آئی وہ زلف پریشاں

शायर: Vafa Malikpuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद आई वो ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ
कट जाएगी अब शब-ए-हिज्राँ

मेरे बा'द ऐ जल्वा-ए-जानाँ
कौन करेगा दावत-ए-मिज़्गाँ

तेरा गिला क्या गेसू-ए-जानाँ
मैं भी परेशाँ तू भी परेशाँ

किस ने देखा ज़ख़्म गुलों का
करते रहे सब सैर-ए-गुलिस्ताँ

देख क़फ़स में आग लगी है
अब्र-ए-बहाराँ अब्र-ए-बहाराँ

अपनी जफ़ा पर अपनी वफ़ा पर
वो भी पशेमाँ हम भी पशेमाँ

एक जिगर के दाग़ से रौशन
तेरा शबिस्ताँ मेरा शबिस्ताँ

मर कर जीना तू ने सिखाया
ऐ ग़म-ए-जानाँ ऐ ग़म-ए-जानाँ