उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mamnun-e-gesu-o-lab-o-ruKHsar kaun hai

मम्नून-ए-गेसू-ओ-लब-ओ-रुख़्सार कौन है

ممنون گیسو و لب و رخسار کون ہے

शायर: Vafa Malikpuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मम्नून-ए-गेसू-ओ-लब-ओ-रुख़्सार कौन है
मुझ सा शहीद-ए-ताला'-ए-बेदार कौन है

महव-ए-तवाफ़-ए-कूचा-ए-जानाँ सभी तो हैं
लेकिन ये देखिए कि सर-ए-दार कौन है

इक शम्अ है सो जलती है अपनी ही आग में
ऐ सोज़-ए-इश्क़ तेरा अज़ादार कौन है

दुनिया है क़ैद-ख़ाना सभी क़ैद हैं मगर
इन क़ैदियों में तेरा गिरफ़्तार कौन है

गुल राह में बिछे हों तो साथी हज़ार हैं
लेकिन रफ़ीक़-ए-वादी-ए-पुर-ख़ार कौन है

दिल में हूँ नावक-ए-ग़म-ए-दौराँ लिए हुए
मुझ सा हरीस-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार कौन है

सब फेरते हैं तुझ से नज़र ऐ ज़वाल-ए-हुस्न
आईने के सिवा तिरा ग़म-ख़्वार कौन है

अपनी दूकाँ बढ़ाइए अब हज़रत-ए-'वफ़ा'
इस दौर में वफ़ा का ख़रीदार कौन है