उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bu-e-gul rang-e-hina naz-e-nasim-e-sahari

बू-ए-गुल रंग-ए-हिना नाज़-ए-नसीम-ए-सहरी

بوئے گل رنگ حنا ناز نسیم سحری

शायर: Vafa Malikpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बू-ए-गुल रंग-ए-हिना नाज़-ए-नसीम-ए-सहरी
तिरे अफ़्सूँ की सब ऐ दोस्त है अफ़्साना-गरी

एक ही हाल पे क़ाएम है अज़ल से अब तक
हुस्न की इश्वा-गरी इश्क़ की शोरीदा-सरी

जाने वाले तो सितारों से परे जा पहुँचे
अहल-ए-महफ़िल लिए बैठे रहे शीशे की परी

अब कोई फ़र्क़ नहीं इन में ख़ज़फ़ हों कि गुहर
हाए ऐ अहद-ए-बसीरत ये तिरी बे-बसरी

कितने मजरूह हैं इस दौर में एहसास-ओ-शुऊ'र
कितनी मज़लूम है इस अह्द में बालिग़-नज़री

तुझ को ऐ दोस्त 'वफ़ा' याद रहे या न रहे
हाँ मगर याद रहेगी मिरी वीराँ-नज़री