उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad aai thi ek baat mujhe

याद आई थी एक बात मुझे

یاد آئی تھی ایک بات مجھے

शायर: Faiyyaz Bostan9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद आई थी एक बात मुझे
सोने में लग गई थी रात मुझे

मैं ने रहना था अपनी मिट्टी पर
ले उड़ीं मेरी ख़्वाहिशात मुझे

तू अगर हम-सफ़र हुआ मेरा
कम पड़ेंगी ये शश-जिहात मुझे

दुनिया-दारी भी करना पड़ती है
इस मोहब्बत के साथ-साथ मुझे

ख़ूब-रू तेरे रू-ब-रू हो कर
ज़ह्र लगती है एहतियात मुझे

पेड़ जो मेरे सामने कटे हैं
कोसते होंगे पात पात मुझे

तुझ को देखा न जा सका जी भर
खाए जाती है ये ही बात मुझे

नींद आती नज़र नहीं आती
आप के ग़म के साथ साथ मुझे

मुफ़्त हूँ और अनोखा हूँ ले ले
ऐ ख़रीदार हाथों हाथ मुझे