उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baad-e-saba KHamosh ho gulzar chup rahen

बाद-ए-सबा ख़मोश हो गुलज़ार चुप रहें

باد صبا خموش ہو گلزار چپ رہیں

शायर: Faiyyaz Bostan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बाद-ए-सबा ख़मोश हो गुलज़ार चुप रहें
वो बात कर रहा है ख़बर-दार चुप रहें

तस्वीर से लड़ें दम-ए-दीदार चुप रहें
बे-वक़्त गुफ़्तुगू करें बे-कार चुप रहें

वो ख़ुश-कलाम नज़्म सी सर-गोशियाँ करे
उस वक़्त झूमते दर-ओ-दीवार चुप रहें

तुझ ख़ूब-रू पे मरने का हक़ पहले मेरा है
शहज़ादी कह भी दे तिरे सालार चुप रहें

कम-गो था मैं सो मुझ पे दलीलों से बैन कर
मैं चाहता था मेरे 'अज़ादार चुप रहें

मेरे तमाम दोस्त मिरे हक़ में ठीक हैं
एक-आध मुझ को रद्द करें दो-चार चुप रहें

याँ बहस चूँकि 'इश्क़ के बारे में जारी है
सो मा'ज़रत के साथ समझदार चुप रहें