उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jugnuon ki qasam diyon ki qasam

जुगनुओं की क़सम दियों की क़सम

جگنوؤں کی قسم دیوں کی قسم

शायर: Faiyyaz Bostan8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुगनुओं की क़सम दियों की क़सम
ख़ूबसूरत है तू दिनों की क़सम

तेरे बिन दुनिया चल नहीं सकती
घर के मतरूक बर्तनों की क़सम

मुझ से नींदों ने पर्दा कर लिया है
तेरे मस्तूर बाज़ुओं की क़सम

ख़त्म है तुझ पे दास्तान-ए-हया
तेरे हमराज़ आइनों की क़सम

तू बहुत सीधी-सादी लड़की है
शिकन-आलूद बिस्तरों की क़सम

तेरा साथ अच्छा लगता है मुझ को
रास्तों की क़सम घरों की क़सम

ज़िंदगी से मुझे मोहब्बत है
रस्सियों की क़सम कुओं की क़सम

मेरे अहबाब मुझ से मुख़्लिस हैं
मुझ को यूसुफ़ के भाइयों की क़सम