उर्दू शायरी · ग़ज़ल

goya KHurshid bhare din mein ayan hota hai

गोया ख़ुर्शीद भरे दिन में 'अयाँ होता है

گویا خورشید بھرے دن میں عیاں ہوتا ہے

शायर: Faiyyaz Bostan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गोया ख़ुर्शीद भरे दिन में 'अयाँ होता है
कोई इस शहर में इस तरह जवाँ होता है

बारहा सखियों के झुरमुट में उसे देखता हूँ
बाग़ में जैसे कोई शो'ला रवाँ होता है

आँखें होती हैं मगर ऐसी कहाँ होती हैं
हुस्न होता है मगर ऐसा कहाँ होता है

जब अचानक तिरे चेहरे पे नज़र पड़ती है
सूरा-ए-नूर की आयत का गुमाँ होता है

इन दिनों तेरी ज़रूरत है हमेशा से ज़ियाद
इन दिनों तू मिरे सद-रंग कहाँ होता है