उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo yak-ba-yak use dil mein utarne ka amal

वो यक-ब-यक उसे दिल में उतारने का 'अमल

وہ یک بہ یک اسے دل میں اتارنے کا عمل

शायर: Nadeem Fazli7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो यक-ब-यक उसे दिल में उतारने का 'अमल
वो अपनी ज़ात पे शब-ख़ून मारने का 'अमल

हज़ार वसवसे दिल में और इक दहकता अलाव
हयात-ए-दश्त में रातें गुज़ारने का 'अमल

बस एक ख़ोशा-ए-गंदुम और ऐसी दर-ब-दरी
वो आसमाँ को ज़मीं पर उतारने का 'अमल

ये 'उम्र मेज़ है गवय्या क़िमार-ख़ाने की
बस एक जीत की ख़्वाहिश में हारने का 'अमल

वो बंद ख़ुशबू का बाद-ए-सबा के वो नाख़ुन
कली के जिस्म से कपड़े उतारने का 'अमल

ग़ज़ब का शोर मचाते होए ये सन्नाटे
वो बे-सदा भी किसी को पुकारने का 'अमल

हुइ है शाम फिर अश्कों से इक वुज़ू हो 'नदीम'
फिर एक रात सितारे शुमारने का 'अमल