उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo puchhte hain ki main kya hun kya bana raha hun

वो पूछते हैं कि मैं क्या हूँ क्या बना रहा हूँ

وہ پوچھتے ہیں کہ میں کیا ہوں کیا بنا رہا ہوں

शायर: Nadeem Malik6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो पूछते हैं कि मैं क्या हूँ क्या बना रहा हूँ
ग़ज़ल के रूप में चेहरा तिरा बना रहा हूँ

हर इक तरह से मुकम्मल है गो तिरी तस्वीर
बदल बदल के नया ज़ाविया बना रहा हूँ

अभी ख़याल को वुस'अत नहीं मिली सो मैं
अभी ख़याल में तुझ को ख़ुदा बना रहा हूँ

चहार सम्त मुझे कुछ नज़र नहीं आया
इसी लिए तो तुझे जा-ब-जा बना रहा हूँ

कशीद कर के मैं अपने ख़याल को मिरे दोस्त
मोहब्बतों का नया सिलसिला बना रहा हूँ

मिरे 'नदीम' तसव्वुर में तेरे है ही नहीं
बग़ौर देख जो मंज़र नया बना रहा हूँ