उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhne se KHalal paDega kya

देखने से ख़लल पड़ेगा क्या

دیکھنے سے خلل پڑے گا کیا

शायर: Nadeem Malik7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखने से ख़लल पड़ेगा क्या
'अक्स पानी में चल पड़ेगा क्या

ग़ौर से मुझ को देखने वाले
मिस्ल-ए-ख़ुर्शीद जल पड़ेगा क्या

ख़ाना-ए-दिल के बंद कमरे से
रहने वाले निकल पड़ेगा क्या

कोई मंज़िल नहीं मिरी फिर भी
रास्ते में ही कल पड़ेगा क्या

एक वीराना मेरे अंदर है
राह में फिर भी थल पड़ेगा क्या

जैसा मंज़र दिखाई देता है
मुझ में सूरज निकल पड़ेगा क्या

वक़्त थामे खड़ा है हाल मिरा
तू कहेगा तो चल पड़ेगा क्या