उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main daraKHton ko sunata hun kahani dil ki

मैं दरख़्तों को सुनाता हूँ कहानी दिल की

میں درختوں کو سناتا ہوں کہانی دل کی

शायर: Nadeem Malik7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं दरख़्तों को सुनाता हूँ कहानी दिल की
और फिर वो भी मिरे दोस्त ज़बानी दिल की

खेलते खेलते दुनिया से गुज़र जाएँगे
अपने बचपन की तरफ़ ले के निशानी दिल की

जब भी आती है तिरी याद खुले आँगन में
बैठ जाता हूँ लिए शोख़ जवानी दिल की

मुझ को साहिल पे खड़ा देख के इरशाद किया
पास आ तुझ को सुनाता हूँ कहानी दिल की

दश्त में फूल उगाने की तमन्ना ले कर
क्यों मिरे साथ हुई नक़्ल-ए-मकानी दिल की

वो भी उड़ते हैं मिरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा की तरह
भूल जाती है जिन्हें बात बतानी दिल की

काश इस बस्ते से निकले मिरे मरने का सुबूत
काश इस फ़िक्र में कट जाए रवानी दिल की