उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh tha uski yaad ka jadu aur kuchh in fankaron ne

कुछ था उस की याद का जादू और कुछ इन फ़नकारों ने

کچھ تھا اس کی یاد کا جادو اور کچھ ان فنکاروں نے

शायर: Nadeem Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ था उस की याद का जादू और कुछ इन फ़नकारों ने
ज़ुल्म किए हैं कैसे कैसे पीठ के पीछे यारों ने

हम भी सुबुकतगीन बने थे इक दिन दश्त के पहलू में
हम पर भी मज़मून लिखा था इन मंफ़ी किरदारों ने

वतन-ए-‘अज़ीज़ की शान में किस ने नौहा लिक्खा रात गए
किस के नाम का परचा काटा वतन के इन ग़द्दारों ने

सुब्ह हुई तो शे'र लिखे थे शहर की सब दीवारों पर
शाम हुई थी दीवारों पर नाम लिखे थे यारों ने

चौदह साल से हम जिस शख़्स को ढूँढ़ रहे थे यार 'नदीम'
आज उस शख़्स को देखा हम नक़्श बनी दीवारों ने