उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo kyon maghmum-o-dil-bardashta hain

वो क्यों मग़्मूम-ओ-दिल-बर्दाश्ता हैं

وہ کیوں مغموم و دل برداشتہ ہیں

शायर: Ghani Ahmad Ghani11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो क्यों मग़्मूम-ओ-दिल-बर्दाश्ता हैं
ये सारे ज़ख़्म तो ख़ुद-साख़्ता हैं

वो हम पर मेहरबाँ बे-साख़्ता हैं
मगर हम हैं कि दिल-बर्दाश्ता हैं

मिरे कुछ हम-सफ़र हमराह मेरे
अगर हैं बा-दिल-ए-ना-ख़्वास्ता हैं

उठाते हैं वो हम पर उँगलियाँ अब
जो अपने साख़्ता-पर्दाख़्ता हैं

कहाँ अब जाएँ नुक्ता-चीं हमारे
शिकस्ता-दिल हज़ीमत-याफ़ता हैं

मिरे अशआ'र दिल में क्यों न उतरें
कि बरजस्ता क़लम-बर्दाश्ता हैं

तुम अपनी राह लो नासेह न उलझो
हमारा क्या है हम जाँ-बाख़्ता हैं

इनायत कम नहीं हम पर फ़ज़ा की
बड़ी हद तक तो हम ख़ुद-साख़्ता हैं

यही नाकामियाँ हैं अपनी मंज़िल
यही दुश्वारियाँ ही रास्ता हैं

जहाँ में क़हत-ए-सुल्ह-ओ-आश्ती है
जिधर देखो सफ़ें आरास्ता हैं

इरादे हैं 'ग़नी' साहिब किधर के
बहुत आरास्ता पैरास्ता हैं