उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum aa gae jo yahan raat ke andhere mein

तुम आ गए जो यहाँ रात के अंधेरे में

تم آ گئے جو یہاں رات کے اندھیرے میں

शायर: Ghani Ahmad Ghani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम आ गए जो यहाँ रात के अंधेरे में
हैं चाँदनी का समाँ रात के अंधेरे में

तुम्हें है शौक़ बहुत तितलियाँ पकड़ने का
फिरो न यूँ मिरी जाँ रात के अंधेरे में

भटकती फिरती हैं रूहें अँधेरी रातों में
निकल पड़े हो कहाँ रात के अंधेरे में

तुम्हारी याद ने दिलकश बना दिया वर्ना
ये दिलकशी थी कहाँ रात के अंधेरे में

यहाँ तो दिन के उजाले में लोग डरते हैं
कहाँ चले हो मियाँ रात के अंधेरे में

मिरा हरीफ़ मुख़ातिब है मुझ से यूँ जैसे
सदा-ए-शोर-ए-सगाँ रात के अंधेरे में

जब आ गई है तबीअ'त तो फ़िक्र क्या वाइज़
मिलेगा कौन यहाँ रात के अंधेरे में

ये किस ख़याल में घर से निकल पड़े हो 'ग़नी'
सुकूँ मिलेगा कहाँ रात के अंधेरे में