उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rangin-nazaran lala-ruKHan yun to bahut hain

रंगीँ-नज़राँ लाला-रुख़ाँ यूँ तो बहुत हैं

رنگیں نظراں لالہ رخاں یوں تو بہت ہیں

शायर: Ghani Ahmad Ghani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंगीँ-नज़राँ लाला-रुख़ाँ यूँ तो बहुत हैं
मसहूर निगाह-ओ-दिल-ओ-जाँ यूँ तो बहुत हैं

हम ही हैं कि जिन के लिए ख़ुद चल पड़ी मंज़िल
वर्ना सू-ए-मंज़िल निगराँ यूँ तो बहुत हैं

है कौन गुज़र जाए जो इस मौज-ए-बला से
आशुफ़्ता-ए-गेसू-ए-बुताँ यूँ तो बहुत हैं

अब देखिए ये बार-ए-करम उठता है कैसे
हम ख़ूगर-ए-बेदाद-ए-बुताँ यूँ तो बहुत हैं

दिल काविश-ए-दौराँ से परेशान है वर्ना
नज़्ज़ारे निगाहों में जवाँ यूँ तो बहुत हैं

है तेरे ही ग़म से ग़म-ए-कौनैन इबारत
कहने को ग़म-ए-कौन-ओ-मकाँ यूँ बहुत हैं

मेयार है बस तू ही मिरे हुस्न-ए-नज़र का
फ़िरदौस-ए-नज़र ख़ुश-नज़राँ यूँ तो बहुत हैं

हम हैं वो जिन्हें ग़म ने तिरे प्यार किया है
आशुफ़्ता-दिल-ओ-शो'ला-ब-जाँ यूँ तो बहुत हैं

हमराह अगर तुम हो तो क्या फ़िक्र 'ग़नी' को
हाँ इश्क़ में रंज और ज़ियाँ यूँ तो बहुत हैं