उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai mere dil mein har ek zaKHm gulistan jaise

है मिरे दिल में हर इक ज़ख़्म गुलिस्ताँ जैसे

ہے مرے دل میں ہر اک زخم گلستاں جیسے

शायर: Ghani Ahmad Ghani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है मिरे दिल में हर इक ज़ख़्म गुलिस्ताँ जैसे
आ गई रास हवा-ए-ग़म-ए-जानाँ जैसे

मेरा ईमान-ए-जवानी निखर आया कुछ और
दे रही है वो नज़र दावत-ए-इस्याँ जैसे

चाँदनी तेरे तसव्वुर की है दिलकश कितनी
हो मिरी शाम-ए-अलम सुब्ह-ए-बहाराँ जैसे

हुस्न और ता'ना-ए-बेचारगी-ए-दस्त-ए-तलब
इश्क़ है बे-ख़बर-ए-तंगी-ए-दामाँ जैसे

यूरिश-ए-ग़म से मिरे दिल का तो ये हाल है अब
चाक कर दे कोई फूलों के गरेबाँ जैसे

मुझ से दीवाने से ये तर्क-ए-जुनूँ की बातें
कम मिले हर्ज़ा-सरा वाइज़-ए-नादाँ जैसे

दिल में इस तरह है अंदेशा-ए-महरूमी-ए-शौक़
सो रहा है सर-ए-साहिल कोई तूफ़ाँ जैसे

जब भी लेता हूँ कोई साँस तो जल उठता हूँ
आतिश-ए-शौक़ हो सीने में फ़रोज़ाँ जैसे

लोग करते हैं मिरे हाल पे यूँ तंज़ 'ग़नी'
ज़हर-ए-ग़म पी के सँभलना भी है आसाँ जैसे