उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nafas-e-arzu hai shoala-taraaz

नफ़स-ए-आरज़ू है शो'ला-तराज़

نفس آرزو ہے شعلہ طراز

शायर: Ghani Ahmad Ghani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नफ़स-ए-आरज़ू है शो'ला-तराज़
सोज़-ए-एहसास तेरी उम्र दराज़

ख़ुश हैं खा कर फ़रेबॉ-ए-इश्वा-ए-नाज़
किस क़दर सादा-दिल हैं अहल-ए-नियाज़

बन गई गर्दिश-ए-जहाँ की हरीफ़
हुस्न की इक निगाह-ए-फ़ित्ना-तराज़

नाम सुनते ही आशियाने का
लौट आई है ताक़त-ए-परवाज़

ख़लिश-ए-दिल बढ़ा गई कुछ और
आप की चश्म-ए-इल्तिफ़ात-नवाज़

कहीं ये उन की रह-गुज़र तो नहीं
झुक पड़ी है 'ग़नी' जबीन-ए-नियाज़

एक ही साज़ के हैं दो नग़्मे
मेरी ख़ामोशी आप की आवाज़