उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jo bole to anjuman mahke

वो जो बोले तो अंजुमन महके

وہ جو بولے تو انجمن مہکے

शायर: Danish Noorpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जो बोले तो अंजुमन महके
दश्त हँसने लगे चमन महके

ज़िक्र उन का लबों पे आते ही
लफ़्ज़ ख़ुशबू बनें दहन महके

जब ख़यालों में उन की ख़ुशबू हो
शे'र की शक्ल में सुख़न महके

डाल दी जिस पे इक नज़र हम ने
'उम्र भर उस का बाँकपन महके

अच्छे आ'माल के नतीजे में
मौत के बा'द भी कफ़न महके

वो जो हों शम'-ए-अंजुमन 'दानिश'
बा-ख़ुदा हर वो अंजुमन महके