उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind usne meri churai hai

नींद उस ने मिरी चुराई है

نیند اس نے مری چرائی ہے

शायर: Danish Noorpuri10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद उस ने मिरी चुराई है
फिर भी दा'वा-ए-पारसाई है

जब ग़ज़ल उस ने गुनगुनाई है
'उम्र-ए-रफ़्ता की याद आई है

बे-सबब तो नहीं धड़कता दिल
दर पे आहट किसी की आई है

हम ने माना कि वो न मानेंगे
बात कहने में क्या बुराई है

शिकवा करना मिरा रक़ीबों से
इक तरह ये भी जग-हँसाई है

उन को अपना भी कह नहीं सकते
हाए क़िस्मत कहाँ पे लाई है

उन को रह रह के याद करना भी
मुद्द'आ-ए-ग़ज़ल-सराई है

मैं पयम्बर हूँ चाँद तारों का
तीरगी से मिरी लड़ाई है

दिन को दिन कह दिया है क्या मैं ने
रात क्यों इतनी तिलमिलाई है

उन का एहसान कितना है 'दानिश'
राह सीधी हमें दिखाई है