उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi KHayal na aaya tere KHayal ke baad

कोई ख़याल न आया तिरे ख़याल के बा'द

کوئی خیال نہ آیا ترے خیال کے بعد

शायर: Danish Noorpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई ख़याल न आया तिरे ख़याल के बा'द
नज़र को कोई न भाया तिरे जमाल के बा'द

हमारे ज़ख़्म लगाते रहे सदा तुम को
हरे जो होते रहे यार इंदिमाल के बा'द

हमारे हिज्र में उन की भी आँख भर आई
ख़ुशी से रोने लगे हम भी उस मलाल के बा'द

शुमार हो गए मुर्दों में कितने ज़िंदा लोग
हयात मिल गई कितनों को इंतिक़ाल के बा'द

ख़ुशी के लम्हे जो आए तो उन से हम बोले
ज़रा सा ठहरो तुम आए हो कितने साल के बा'द

दु'आ विसाल की क्यों माँगते हो ऐ 'दानिश'
बचेगा माँगने को क्या शब-ए-विसाल के बा'द