उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chand suraj koi aKHtar nahin dekha humne

चाँद सूरज कोई अख़्तर नहीं देखा हम ने

چاند سورج کوئی اختر نہیں دیکھا ہم نے

शायर: Danish Noorpuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँद सूरज कोई अख़्तर नहीं देखा हम ने
आप के जैसा मुनव्वर नहीं देखा हम ने

तुझ से बिछड़े तो कभी घर नहीं देखा हम ने
अपने साए को भी मुड़ कर नहीं देखा हम ने

हम को मा'लूम नहीं होता है कैसा दर्पन
आज तक अपना भी पैकर नहीं देखा हम ने

फ़ज़्ल पर उस के भरोसा था मगर ख़ुद पे न था
सो गुनाहों का कोई दर नहीं देखा हम ने

चील कव्वे तो बहुत देखे तिरी बस्ती में
अम्न का कोई कबूतर नहीं देखा हम ने

इक नज़र पड़ते ही ये ताब-ए-नज़ारा भी गई
इस लिए उस को मुकर्रर नहीं देखा हम ने

लोग पढ़ लेते हैं चेहरे पे लिखी हसरत को
इक नज़र देखा बराबर नहीं देखा हम ने

बात करना तो बहुत दूर है 'दानिश' उस को
आँख भर कर कभी दम भर नहीं देखा हम ने