उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo husn aankh se dekha hua yaqin mujhe

वो हुस्न आँख से देखा हुआ यक़ीन मुझे

وہ حسن آنکھ سے دیکھا ہوا یقین مجھے

शायर: Danish Hayat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो हुस्न आँख से देखा हुआ यक़ीन मुझे
अगरचे रोज़ बताते थे ज़ाएरीन मुझे

मैं आप अपना तमाशा तमाश-गाहों में
तमाशा-गर क्यों समझता तमाशबीन मुझे

हर एक को मैं परखता था दिल की आँखों से
बहुत क़रीब दिखाती थी दूरबीन मुझे

मैं आस्तीन में पलते हुओं को जानता हूँ
सो दुश्मनों में समझ लें मुनाफ़िक़ीन मुझे

मैं रात उन की तरह ख़ाक छानता रहा हूँ
सो दश्त-ज़ाद समझते रहे मकीन मुझे

मैं मुन्कशिफ़ ही नहीं हो रहा था ख़ुद उन पर
बग़ौर पढ़ते रहे थे कई ज़हीन मुझे