उर्दू शायरी · ग़ज़ल

falak se gar balaen aa rahi hain

फ़लक से गर बलाएँ आ रही हैं

فلک سے گر بلائیں آ رہی ہیں

शायर: Danish Hayat4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़लक से गर बलाएँ आ रही हैं
ज़रा ठहरो दु'आएँ आ रही हैं

मैं समझा था कि मिट जाएँगी यादें
मगर ताज़ा हवाएँ आ रही हैं

यहाँ इक बाग़ था बस्ती से पहले
परिंदों की सदाएँ आ रही हैं

जो पूछा क़ैस ने लैला कहाँ है
कहा तशरीफ़ लाएँ आ रही हैं