उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ain mumkin hai aziyyat se nikal aaenge

'ऐन मुमकिन है अज़िय्यत से निकल आएँगे

عین ممکن ہے اذیت سے نکل آئیں گے

शायर: Danish Hayat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'ऐन मुमकिन है अज़िय्यत से निकल आएँगे
हम तिरे बा'द मोहब्बत से निकल आएँगे

तुम भी देखो कभी दीवार तक आया हुआ दश्त
आबले आँख में वहशत से निकल आएँगे

हम भी फिर घर से निकल आएँगे सीटी ले कर
और परिंदे भी शरारत से निकल आएँगे

दोस्त काँटों को बिछाते हुए थक जाएँगे
और हम लोग महारत से निकल आएँगे

साथ छोड़ेंगे नहीं हम तिरा आदम की तरह
पीछे पीछे तिरे जन्नत से निकल आएँगे