उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib naqsh banate hawa guzarti hai

'अजीब नक़्श बनाते हवा गुज़रती है

عجیب نقش بناتے ہوا گزرتی ہے

शायर: Danish Hayat4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अजीब नक़्श बनाते हवा गुज़रती है
कि ख़द्द-ओ-ख़ाल मिटाते हवा गुज़रती है

सुकूत फैलने लगता है मेरे चारों तरफ़
फिर एक शोर मचाते हवा गुज़रती है

हमारी ख़ाक उड़ाने से कुछ नहीं होगा
हमारी ख़ाक उड़ाते हवा गुज़रती है

गली में चलते हुए इक फ़क़ीर ने कल शब
बता दिया जो बताते हवा गुज़रती है