उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon se laga lo meri andaza-e-wahshat

आँखों से लगा लो मिरी अंदाज़ा-ए-वहशत

آنکھوں سے لگا لو مری اندازۂ وحشت

शायर: Danish Hayat4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों से लगा लो मिरी अंदाज़ा-ए-वहशत
तुम खोल नहीं पाओगे दरवाज़ा-ए-वहशत

हर आन सँवरती हुई आशुफ़्ता-मिज़ाजी
हर लहज़ा बिखरता हुआ शीराज़ा-ए-वहशत

ता-हद्द-ए-नज़र चारों तरफ़ ज़र्द उदासी
अन्दर की तरफ़ खुल गया दरवाज़ा-ए-वहशत

है तुम को क़सम दश्त में मुड़ कर नहीं तकना
आए भी तो होगा फ़क़त आवाज़ा-ए-वहशत