उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo gum sharab mein kyon aae hum ko kya malum

वो गुम शराब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

وہ گم شراب میں کیوں آئے ہم کو کیا معلوم

शायर: Kamal Ahmad Siddiqi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो गुम शराब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम
हम एहतिसाब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

लिखा था हम ने कि चेहरा तुम्हारा भूल गए
वो ख़ुद जवाब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

उन्हें पसंद नहीं है हमारी गुस्ताख़ी
हम उन के ख़्वाब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

वो सानहे जो तसव्वुर में हम पे गुज़रे थे
तिरी किताब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

जिन्हें था ज़ो'म बहुत अपनी पारसाई का
वो सौ हिजाब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

वो तिश्ना-लब कि जिन्हें तिश्नगी का 'इरफ़ाँ था
वही सराब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

ये पूछना है तो पूछो निगाह-ए-क़ातिल से
हम इंतिख़ाब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम

'कमाल' और भी शा'इर थे रात महफ़िल में
तुम्हीं 'इताब में क्यों आए हम को क्या मा'लूम