उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har ek qadam pe Thokaron ka hausla bhi chahiye

हर इक क़दम पे ठोकरों का हौसला भी चाहिए

ہر اک قدم پہ ٹھوکروں کا حوصلہ بھی چاہیے

शायर: Kamal Ahmad Siddiqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर इक क़दम पे ठोकरों का हौसला भी चाहिए
मसर्रतों को तल्ख़ियों का आइना भी चाहिए

ख़लाओं में भटक के कौन पा सका है ज़िंदगी
ख़ुदी की परवरिश के वास्ते फ़ज़ा भी चाहिए

अभी ख़ुदी तो कमतरी का कासा-ए-गदाई है
फ़रेब-ए-ज़ौक़-ए-आरज़ू की इंतिहा भी चाहिए

खनक रही हैं साग़रों में मुज़्तरिब हक़ीक़तें
हक़ीक़तों की दिलकशी का तजज़िया भी चाहिए

ख़याल-आफ़रीनियों का नाम तो नहीं हयात
तसल्लियों को ख़ाक-ओ-ख़ूँ का रास्ता भी चाहिए

अभी थे लब पे सरख़ुशी के गीत अब ये हिचकियाँ
मु'आफ़ कर शिकस्त-ए-साज़ को सदा भी चाहिए

हूँ नंग-ए-मय-कदा बहार-ए-मय-कदा को ऐ 'कमाल'
मिरी ही तिश्नगी का लेकिन आसरा भी चाहिए