उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo chup raha to hua is qadar malal mujhe

वो चुप रहा तो हुआ इस क़दर मलाल मुझे

وہ چپ رہا تو ہوا اس قدر ملال مجھے

शायर: Balraj Bakhshi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो चुप रहा तो हुआ इस क़दर मलाल मुझे
कि जाते जाते कई दे गया सवाल मुझे

ये सच है आ न सका मैं किसी के काम मगर
कहाँ रहा कभी अपना भी कुछ ख़याल मुझे

बसा हुआ हूँ मैं फूलों में ख़ुशबुओं की तरह
हवा चली तो बिखर जाऊँगा सँभाल मुझे

उसी को मेरी ख़मोशी क़ुबूल-ए-जुर्म लगी
कभी न करने दिया जिस ने 'अर्ज़-ए-हाल मुझे

खुली ज़मीन में फल फूल जाऊँगा इक दिन
तू इस यक़ीं पे न गमले से अब निकाल मुझे

वो मेरा दोस्त है दुश्मन है क्या यक़ीन करूँ
मैं पात पात हूँ करता है डाल डाल मुझे

तो क्या हुआ जो ज़माना मुझे मिटाने लगा
बना रहा है वो सब के लिए मिसाल मुझे

न जाने किस के ख़यालों में आऊँगा 'बलराज'
न जाने कौन कभी देगा ख़द्द-ओ-ख़ाल मुझे