उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hadse aur bhi hain shahr mein hone wale

हादसे और भी हैं शहर में होने वाले

حادثے اور بھی ہیں شہر میں ہونے والے

शायर: Balraj Bakhshi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हादसे और भी हैं शहर में होने वाले
आँसुओं की न कमी हो कहीं रोने वाले

ज़ाब्ते खेल के आसान हुए जाते हैं
अब जो तैरेंगे वही होंगे डुबोने वाले

ऐसी तहज़ीब नज़र आने लगी बच्चों में
नज़र आते नहीं गलियों में खिलौने वाले

मेरी गुस्ताख़ियाँ बाक़ी हैं अभी थोड़ी सी
तुम भी कुछ देर शराफ़त नहीं खोने वाले

नींद तो नींद है काँटों पे भी आ जाती है
सो ही जाते हैं कि होते हैं जो सोने वाले

अब के जो काटनी है फ़स्ल लहू की 'बलराज'
ये विरासत मिरे अज्दाद हैं बोने वाले