उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahan kahan na gaya an-suni dua ki tarah

कहाँ कहाँ न गया अन-सुनी दु'आ की तरह

کہاں کہاں نہ گیا ان سنی دعا کی طرح

शायर: Balraj Bakhshi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहाँ कहाँ न गया अन-सुनी दु'आ की तरह
फिर अपने दर पे चला आया इल्तिजा की तरह

किसी ने मुफ़्त न बाज़ार में लिया मुझ को
मैं ख़त्म हो भी गया मौसम-ए-वफ़ा की तरह

जब अपने क़त्ल का मुजरिम क़रार पाया गया
मुझे वसूल किया सब ने ख़ूँ-बहा की तरह

सुना किसी ने तो बच जाएगा वुजूद मिरा
बिखर रहा हूँ मैं सहराओं में सदा की तरह

न चाहते हुए भी मुस्कुराने लगता हूँ
ख़याल उन का गुज़रता है जब सबा की तरह

पता नहीं था ये दिन देखना पड़ेगा मुझे
कि पेश आएगा मेरा ख़ुदा ख़ुदा की तरह

ज़रा सी देर में सब ढूँडने लगे हैं मुझे
जो पिस रहा हूँ मैं 'बलराज' अब हिना की तरह