उर्दू शायरी · ग़ज़ल

daraaz hota nahin hai dast-e-sawal mera

दराज़ होता नहीं है दस्त-ए-सवाल मेरा

دراز ہوتا نہیں ہے دست سوال میرا

शायर: Balraj Bakhshi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दराज़ होता नहीं है दस्त-ए-सवाल मेरा
न जाने कैसे वो जान पाएगा हाल मेरा

रफ़ाक़तों में तो फ़ासले भी हैं क़ुर्बतें भी
पता नहीं ये कि हिज्र है या विसाल मेरा

बचा बचा कर मैं लम्हे लम्हे को जोड़ता हूँ
और आते ही ख़र्च होने लगता है साल मेरा

मैं जिस के माज़ी की गुम-शुदा दास्ताँ हूँ कोई
क़रीब उसी के न आए जाए ख़याल मेरा

वो जिस ने दुश्मन समझ के दिल में बसा लिया है
कभी तो 'बलराज' मान लेगा कमाल मेरा