उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo chale ja rahe nikharte hi

वो चले जा रहे निखरते ही

وہ چلے جا رہے نکھرتے ہی

शायर: Lokesh Tripathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो चले जा रहे निखरते ही
हम चले जा रहे बिखरते ही

इस लिए याद मैं नहीं करता
याद आती है याद करते ही

दोस्त हैं वक़्त के बड़े पक्के
आ गए हैं गिलास भरते ही

मर गई माँ तो बट गए ज़ेवर
बट गया घर पिता के मरते ही

सुन मिरा दौर फिर से आएगा
इस बुरे दौर के गुज़रते ही