उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chand tare nihaaro zara der ko

चाँद तारे निहारो ज़रा देर को

چاند تارے نہارو ذرا دیر کو

शायर: Lokesh Tripathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँद तारे निहारो ज़रा देर को
नाम मेरा पुकारो ज़रा देर को

रू-ब-रू हो ही जाएँ हक़ीक़त से सब
आसमाँ तुम उतारो ज़रा देर को

आज-कल याद भी कोई करता नहीं
जान से हम को मारो ज़रा देर को

हारते हारते थक गया हूँ मैं अब
हम से तुम भी तो हारो ज़रा देर को

मेरी मेहनत का फल कब मिलेगा मुझे
कुंडली तो विचारो ज़रा देर को