उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaT par KHatm har kahani hai

घाट पर ख़त्म हर कहानी है

گھاٹ پر ختم ہر کہانی ہے

शायर: Lokesh Tripathi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घाट पर ख़त्म हर कहानी है
राख ही आख़िरी निशानी है

ज़िंदा रह कर किसे समझ आया
सब ने मर कर ये बात जानी है

लोग आते हैं लोग जाते हैं
हम को भी रस्म ही निभानी है

कैसे कह दूँ कि ख़त्म है सब कुछ
झूटी उम्मीद जो दिलानी है