उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek KHushi Thik se nahin aai

इक ख़ुशी ठीक से नहीं आई

اک خوشی ٹھیک سے نہیں آئی

शायर: Lokesh Tripathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक ख़ुशी ठीक से नहीं आई
ज़िंदगी माँगती है भरपाई

सारे मेले निकाल लो मुझ से
मुझ में रहने दो सिर्फ़ तन्हाई

साँझ ढलने लगी है जीवन की
लम्बी होने लगी है परछाई

वो जहाँ है वहीं पे उत्सव है
इस में बजती है कोई शहनाई

बात इक याद आ गई मुझ को
उस से फिर बात हो नहीं पाई