उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barish ki rut mein sahra ho jata hai

बारिश की रुत में सहरा हो जाता है

بارش کی رت میں صحرا ہو جاتا ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बारिश की रुत में सहरा हो जाता है
दिल-दरिया को जाने क्या हो जाता है

साँझ-पवन मुझ में आ कर रुक जाती है
और इक हब्स-दरीचा वा हो जाता है

दिल का सूना रहना ठीक नहीं साहब
सूना घर आसेब-ज़दा हो जाता है

झोंका आते ही सैराब सदाओं का
ख़ामोशी का ज़ख़्म हरा हो जाता है

रम्ज़ खुलें जब तक इस चाक-सवारी के
तब तक इक चक्कर पूरा हो जाता है

आवाज़ें आवाज़ों में ज़म होती हैं
धीरे-धीरे सन्नाटा हो जाता है

आख़िर-ए-शब दरिया में साँप उतरते हैं
सुब्ह तलक पानी नीला हो जाता है