उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zat ke azab sah rahe hain hum

ज़ात के 'अज़ाब सह रहे हैं हम

ذات کے عذاب سہ رہے ہیں ہم

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ात के 'अज़ाब सह रहे हैं हम
शुक्र है कि शे'र कह रहे हैं हम

इस मकाँ में और कोई भी नहीं
या'नी अपने साथ रह रहे हैं हम

ले न जाए हम को शह्र-ए-यास में
जिस हवा के साथ बह रहे हैं हम

ऐ हवा-ए-सर्द कोई इस्म फूँक
जून से उदास रह रहे हैं हम

सिलवटें लिए हुए वुजूद पर
एक 'उम्र ख़ुद में तह रहे हैं हम

फिर ग़ुबार उठ रहा है ज़ात से
शाम हो रही है ढह रहे हैं हम