उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dasht ki KHak bhi chhani hai

दश्त की ख़ाक भी छानी है

دشت کی خاک بھی چھانی ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दश्त की ख़ाक भी छानी है
घर सी कहाँ वीरानी है

कश्ती वाले हैं मायूस
घुटनों घुटनों पानी है

और बरस इक बीत गया
कब तक ख़ाक उड़ानी है

ऐसी प्यास और ऐसा सब्र
दरिया पानी-पानी है

रक़्स में हैं दीवाने सब
कुछ तो ख़ुश-इम्कानी है

क़ातिल कोई अपना था
आँखों में हैरानी है

हम ने चख कर देख लिया
दुनिया खारा पानी है