उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zarron ki baaton mein aane wala tha

ज़र्रों की बातों में आने वाला था

ذروں کی باتوں میں آنے والا تھا

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़र्रों की बातों में आने वाला था
मैं सहरा से रब्त बढ़ाने वाला था

बारिश उम्मीदों पर पानी फेर गई
मैं लम्हों को धूप लगाने वाला था

फिर याद आया दूर बहुत ही दूर हो तुम
मैं पागल आवाज़ लगाने वाला था

इक अज़ली डर ने मुझ को मोहतात किया
मैं जब सेब को हाथ लगाने वाला था

जाने कैसे रात अमावस की उतरी
मैं काग़ज़ पर चाँद बनाने वाला था

एक किरन ने मुझ को वापस खींच लिया
मैं बस जिस्म से बाहर आने वाला था