उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum na dhyani the na irfani the

हम न ध्यानी थे न 'इरफ़ानी थे

ہم نہ دھیانی تھے نہ عرفانی تھے

शायर: Vikas Sharma Raaz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम न ध्यानी थे न 'इरफ़ानी थे
हम सुख़न-साज़ तो इम्कानी थे

उस की क़िरअत से हुए हैं आज़ाद
हम जो इक लफ़्ज़ के ज़िंदानी थे

ख़ाक से बा'द में मंसूब हुए
अव्वल-ए-अव्वल तो सभी पानी थे

हम जिसे ओढ़े हुए रहते थे
ख़्वाब उसी नींद की 'उर्यानी थे

अब जो आबाद नज़र आता है
हम उसी दश्त की वीरानी थे

हम किसी और की मुश्किल हैं अब
हम किसी और की आसानी थे

सब्ज़ रहता था वो हर मौसम में
उस की आँखों में कई पानी थे

उस का इदराक बदन भर ही था
और मिरे मसअले रूहानी थे