उर्दू शायरी · ग़ज़ल

karb mein qahqahe lagata hun

कर्ब में क़हक़हे लगाता हूँ

کرب میں قہقہے لگاتا ہوں

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कर्ब में क़हक़हे लगाता हूँ
इतनी वहशत कहाँ से लाता हूँ

ध्यान-दरिया में पड़ रहे हैं भँवर
तैरता हूँ तो डूब जाता हूँ

उठ तो आया हूँ उस की महफ़िल से
देखिए कितनी दूर जाता हूँ

वो कहाँ याद करता है मुझ को
ये दिया सिर्फ़ मैं जलाता हूँ

जस्त भरता हूँ जब तसव्वुर की
रुत की दीवार फाँद जाता हूँ

धूप भी ताक में है साया भी
देखिए किस के हाथ आता हूँ